जब लिखने बैठता हू तो समझ नहीं आता कि कहा से शुरुआत करू , मन में इतनी बाते है किसको पहला अवसर दू जो मेरे मन से निकल के मेरे कलम के जरिये इन पन्नो में छप जाये और मुझे शुकुन से जीने दे। विचारो की ऐसी सुनामी उफ़न रही है मन में कि किसी एक को पकड़ना और सुनामी में डूब कर उस विचार को बाहर निकालना असम्भव सा लग रहा है। कभी सोचा नहीं था की मैं खुद पे तरस खाऊंगा , लेकिन आज आ रहा है। कहा खो जाता हूँ पता नहीं चलता , बस जब होश आता है तो खुद को कमरे में अकेला और आखो को पानी में गिला महसूस करता हूँ। दुनिया कहती है छोटी - छोटी चीजों में खुशिया ढूंढो। बस मैंने भी यही किया, हर छोटी चीज में खुश होने लगा। किसी बड़े बदलाव की चाहत ही नहीं की ,बस यही चाहा की अपने परिवार के साथ यही छोटी - छोटी खुशियां जीता चला जाऊ। लेकिन अब तो एक अरसा हो गया कोई छोटी ख़ुशी मनाये हुए ,कैसे उम्मीद करलू कि कुछ बहुत अच्छा होगा। ऐसा नहीं है की टूट चुका हूँ , हार चुका हु , मैं तो लड़ रहा हूँ , खुद से और अपने वक़्त से , देखता हूँ कितना चलता है ये बुरा व...
"लड़की घर से भाग गयी" एक ऐसा वाक्य जो भारतीय समाज में किसी भी धर्म , जाति या तबके के परिवार में भूचाल लाने के लिए काफी है। ये अतिश्योक्ति तो नहीं होगी यदि कहा जाये की कोई भी परिवार में किसी की मृत्यु तो सेहन कर सकता है परन्तु लड़की का घर भागना उसके पुरे परिवार पे वज्रपात सा गिरता है। और ऐसा कदम उठाने के बाद सम्पूर्ण समाज की आलोचना, बहिष्कार व तिरस्कार पर मानो उस लड़की का एकाधिकार सा होगया हो। शायद हम और हमारा समाज किसी बलात्कार के अपराधी के साथ भी ऐसा हीन भाव नहीं दर्शाते होंगे जैसा घर से भागी हुई एक लड़की के प्रति दिखते है। जिन दोस्तों, सहेलिओ या पडोसियो के साथ उसका बचपन बीता था, वो उस लड़की से ऐसे दूर भागते है मानो कोई जानलेवा छुआछूत की बीमारी होगयी हो। अपनी एक चाहत को पूरा करने के लिए उठाया गया कदम उसके लिए अभिशाप से कम नहीं होता। जो लड़की अकेले चौराहे की दुकान तक नहीं जाती थी वो आज अकेली पुरे समाज का बहिस्कार सहन कर रही है और हम पुरजोर कोशिश करते है की उस लड़की का जीना मुश्किल हो जाये। अपने घर की लड़कीयो को उसका उदाहरण दिया जाता है की उसके जैसी हरकत मत कर...
यदि आप किसी व्यक्तिगत या पेशेवर कारण से सकारात्मक रूप से प्रभावशाली व्यक्तिओं को अपने साथ नहीं रख पा रहे हैं। तो बेहतर होगा अपना समय प्रभावशाली किताबो के बीच बिताये। IF YOU ARE NOT ABLE TO KEEP POSITIVELY INFLUENTIAL PEOPLE WITH YOU FOR SOME PERSONAL OR PROFESSIONAL REASON. SO IT WOULD BE BETTER TO SPEND YOUR TIME AMONG INFLUENTIAL BOOKS.
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