Kaun Sa Hain.

अंदर सैलाब है पर चेहरे पे मौन सा है। 
मैं ही जानते हूं मुझमे सोया जानवर कौन सा है।

ख़ामोशी को नादानी समझने की भूल ना करना।
मुझे सब इल्म है जो तेरे घूंघट के पीछे ढोंग सा है।

ज़माने के तानो की मुझे फिक्र नहीं होती।
अच्छे से जनता हूँ, धुला दूध का, ये ज़माना कौन सा है।

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